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घड़ी

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प्रमुख तथ्य
सामान्यत: किसी घड़ी में चार अवयव होते हैं
(i) डायल यह गोलाकार अथवा चौकोर आकार की पट्टिका होती है जिस पर 1 से 12 तक के अंक अथवा बिन्दु अंकित होते हैं।

(ii) घण्टे की सूई घण्टे की सूई, मिनट की सूई से थोड़ी छोटी होती है तथा यह निश्चित समय को व्यक्त करती है, जैसे-यदि घण्टे की सूई 4′ पर हो तथा मिनट की सूई ’12’ पर हो, तो यह इस बात का द्योतक होगा कि अभी घड़ी में 4 बज रहे हैं।


(iii) मिनट की सूई मिनट की सूई घण्टे की सूई से थोड़ी बड़ी होती है तथा यह घण्टे की सूई के साथ मिलकर समय की निश्चितता को व्यक्त करने में सहायक की भूमिका अदा करती है, जैसे-यदि घण्टे की सूई ‘6″ पर हो तथा मिनट की सूई ’12” पर हो, तो यह इस बात का द्योतक होगा कि अभी घड़ी में ‘6″ बज रहे हैं। लेकिन यदि घण्टे की सूई ‘6″ से थोड़ी आगे हो तथा मिनट की सूई ‘3’ पर हो, तो यह इस बात का द्योतक होगा कि अभी घड़ी में 6 बजकर 15 मिनट हो रहे हैं।

(iv) सेकण्ड की सूई सामान्यत: सेकण्ड की सूई, मिनट की सूई से थोड़ी बड़ी तथा पतली होती है। यह घण्टे और मिनट दोनों ही सूईयों के विचलन में सहायक की भूमिका अदा करती है। घड़ी के डायल की सम्पूर्ण परिधि की माप 360° होती है अर्थात् हम यह कह सकते है कि यदि कोई सूई clockwise ’12’ से चलते हुए ’12’ पर पहुँच जाती है, तो यह इस बात का द्योतक है कि वह सूई 360° के पथ का परिभ्रमण कर चुकी है।
घड़ी के किसी भी दो निकटवर्ती अंकों के बीच के कोण की माप ‘30०’ होती है, जैसे-‘2’ और ‘3” के बीच के कोण की माप ‘30०’ है।
प्रति मिनट सूईयों का विचलन (डिग्री में) निम्न प्रकार होता है
सेकण्ड की सूई ⇒ 360°  प्रति मिनट
मिनट की सूई ⇒ 6°  प्रति मिनट
घण्टे की सूई ⇒ 1/2° प्रति मिनट
सामान्यत: इस अध्याय से तीन प्रकार के प्रश्न पूछे जाते हैं

 

प्रकार 1

अक्षरों के व्यवस्थीकरण पर आधारित प्रश्न
साधारणतया अक्षरों के व्यवस्थीकरण से सम्बन्धित प्रश्नों में अंग्रेजी वर्णमाला या विपरीत वर्णमाला के क्रमागत या एकान्तरित अक्षरों को घड़ी की चाल की दिशा में या घड़ी की चाल की विपरीत दिशा में अंकों के स्थान पर व्यवस्थित करते हुए किसी निश्चित अंक के स्थान पर कौन-सा अक्षर आएगा, इस बात की सुनिश्चितता से सम्बन्धित प्रश्न पूछे जाते हैं।
अब आइए, अक्षरों के व्यवस्थीकरण के अन्तर्गत पूछे जाने वाले प्रश्नों के प्रारूप व उसके व्याख्यात्मक हल का ध्यानपूर्वक अवलोकन करें।

उदाहरण 1. यदि घड़ी के डायल पर स्थित अंकों के स्थान पर अंग्रेजी वर्णमाला के अक्षरों को इस प्रकार से व्यवस्थित कर दिया जाए कि अंक “2” के स्थान पर अक्षर ‘G’ आ जाए, इसी प्रकार अंक 3″ के स्थान पर अक्षर ‘H’ आ जाए और आगे भी इसी प्रकार से परिवर्तन का क्रम जारी रहे, तो अंक 12 के स्थान पर कौन-सा अक्षर आएगा ?

(a) S   (b) Q   (c) M   (d) N

हल : (b) प्रश्नानुसार हम देख रहे हैं कि अंक “2” के लिए अंग्रेजी वर्णमाला के अक्षर ‘G’ का प्रयोग किया गया है, फिर अंक 3 के लिए अंग्रेजी वर्णमाला के अक्षर ‘H’ का प्रयोग किया गया है, इसी प्रकार आगे भी अर्थात् अंक ‘4″ के लिए अंग्रेजी वर्णमाला के अक्षर ‘|’ का प्रयोग किया जाएगा।
अत:

2 ⇒+5 ⇒ 7

3 ⇒+5 ⇒ 8
इसी प्रकार, 12 ⇒ +5 ⇒ 17

यहाँ हम देख रहे हैं कि अंक एवं वर्णमाला में क्रमांकिक मान का अन्तर समान है, अत: ’12” के लिए अंग्रेजी वर्णमाला में प्रयुक्त होने वाले अक्षर का आंकिक मान (12 + 5) = 17 होगा और हम जानते है कि अंग्रेजी वर्णमाला में 17 क्रमांकिक मान वाला अक्षर ‘Q’ है।
अत: अभीष्ट अक्षर ‘Q’ होगा। .

 

उदाहरण 2. यदि घड़ी के डायल पर स्थित अंकों के स्थान पर अंग्रेजी वर्णमाला के अक्षरों को इस प्रकार से व्यवस्थित कर दिया जाए कि अंक ‘6″ के स्थान पर अक्षर ‘U’ आ जाए, अंक ‘5’ के स्थान पर अक्षर ‘R’ आ जाए, इसी प्रकार अंक ‘4″ के स्थान पर अक्षर ‘O’ आ जाए और आगे भी इसी प्रकार से परिवर्तन का क्रम जारी रहे, तो अंक ‘1’ के स्थान पर कौन-सा अक्षर आएगा ?

(a)(b)(c)(d) K

हल : (b)

6 ⇒ × 3 + 3 ⇒21

5 ⇒ × 3 + 3 ⇒ 18

4 ⇒ × 3 + 3 ⇒ 15

ठीक इसी प्रकार, 1 ⇒ × 3 + 3 ⇒ 6 = F
यहाँ हम देख रहे हैं कि प्रत्येक अंक को उसके तीन गुने में 3 जोड़कर जो क्रमांक प्राप्त होता है, वर्णमाला क्रम में उसी क्रमांक पर प्रयुक्त अक्षर उस संख्या के लिए आया है। ठीक इसी प्रकार, अंक ‘1’ के तीन गुने में 3 जोड़ने पर अंक 6 प्राप्त होता है और वर्णमाला क्रम में छठवें स्थान पर अक्षर ‘F’ है। अत: अभीष्ट अक्षर ‘F’ होगा।

 

प्रकार 2

डिग्री पर आधारित प्रश्न
डिग्री से सम्बन्धित प्रश्नों में कोई निश्चित समय दिया गया होता है तथा उसी निश्चित समय के आधार पर अभ्यर्थी को यह तय करना होता है कि दिए गए निश्चित समय के दौरान घंटे और मिनट की सुईं के बीच कितने डिग्री का कोण बन रहा है।

इस प्रकार के प्रश्नों को आसानी से हल करने के लिए नीचे दिए गए प्रमुख सूत्रों का ध्यानपूर्वक अवलोकन करें। यहाँ मिनट का तात्पर्य है—मिनट वाली सूई के स्थान पर प्रयुक्त संख्या जैसे-20 मिनट, 4.30 मिनट, 6.35 मिनट, 7 इत्यादि यदि मिनट की सूई घण्टे की सूई से पीछे रहे
अभीष्ट डिग्री = मिनट और घंटे के बीच की संख्या में अंतर ×30 ± मिनट/2

प्रश्न में दिए गए मिनट

यदि मिनट की सूई घण्टे की सूई से आगे रहे

⇒ अब आइए, उपरोक्त तथ्यों के स्पष्टीकरण के लिए इस अध्याय से पूछे जाने वाले प्रश्नों व उनके व्याख्यात्मक हल का ध्यानपूर्वक अवलोकन करें।

उदाहरण 1. यदि किसी घड़ी में 7 बजकर 30 मिनट हो रहे हैं, तो उस वक्त घण्टे एवं मिनट की सूईयों के बीच कितने डिग्री का कोण बनेगा?

(a) 120°   (b) 95°   (c) 45°   (d) 75°

हल : (C) समय = 7 : 30

इस स्थिति में घण्टे और मिनट की सूईयों की स्थिति-मिनट की सूई 6 पर होगी तथा घण्टे की सूई 7 और 8 के बीच में होगी।

घण्टे की सूई एक मिनट में ½° विचलित होती है

30 मिनट में घण्टे की सूई का विचलन = 1/2 × 30 = 15°

अर्थात् घण्टे की सूई 7 से 15° पर होगी।

सूईयों की स्थिति से अंकों में अन्तर =7-6 + 15° = 1 + 15°

1 का अन्तर = 30°

1 – 15° – 30° + 15° = 45°

अत: अभीष्ट कोण = 45° सूत्रानुसार अभीष्ट कोण =(7–6) × 30° + 30°/2

= 1 × 30° – 159 – 30 + 15° – 45° 3

 

उदाहरण 2. यदि किसी घड़ी में 5 बजकर 45 मिनट हो रहे हैं, तो उस समय मिनट और घण्टे की सूईयों के बीच कितने डिग्री का कोण बनेगा?

(a) 97   (b) 120°   (c) 105   (d) 142

हल : (a) समय = 5 : 45 इस स्थिति में घण्टे और मिनट की सूईयों की स्थिति-मिनट की सूई 9 पर होगी तथा घण्टे की सूई 5 से ऊपर होगी। साथ ही मिनट की सूई घण्टे की सूई से आगे है।

अतः अब सूत्र से,

अभीष्ट कोण =(9–5) × 30° – 45/2
= 120° – 22½° =97½°

 

उदाहरण 3. यदि किसी घड़ी में 12 बजकर 20 मिनट हो रहे हैं, तो उस समय घण्टे एवं मिनट की सूईयों के बीच कितने डिग्री का कोण बनेगा?

(a) 110°   (b) 127°   (c) 97½°   (d) 84°

हल : (a) समय = 12: 20

12 बजकर 20 मिनट पर घण्टे की सूई 12 के थोड़ी ऊपर होगी तथा मिनट की सूई 4 पर होगी। साथ ही मिनट की सूई घण्टे की सूई से आगे होगी।

सूत्र से, अभीष्ट कोण =(4-0) × 30 – 20/2

120 – 10 = 110°

⇒ नोट-जब घण्टे की सूई 12 पर हो, तो इसे ‘0’ संख्या के रूप में गिनती करके मिनट तथा घण्टे के बीच की संख्या में अन्तर ज्ञात करते हैं।

 

उदाहरण 4. यदि किसी घड़ी में 4 बजकर 47 मिनट हो रहे हैं, तो उस समय घण्टे एवं मिनट की सूईयों के बीच कितने डिग्री का कोण बनेगा?

(a) 97½°   (b) 83½°   (c) 110°   (d) इनमें से कोई नहीं

हल: (d) सूत्रानुसार, कोण

 

उदाहरण 5. यदि किसी घड़ी में 9 बजकर 22 मिनट हो रहे हैं, तो उस समय घण्टे एवं मिनट की सूईयों के बीच कितने डिग्री का कोण बनेगा?

(a) 119°   (b) 145°   (c) 149°   (d) 161°

हल: (C) अभीष्ट कोण

 

 

प्रकार 3

समतल दर्पण पर आधारित प्रश्न

समतल दर्पण को उसकी स्थिति के आधार पर दो वर्गों में विभाजित किया गया है

(i) लम्बवत्-दर्पण (Vertical Mirror) समतल दर्पण की ऐसी स्थिति जो किसी क्षेतिज तल के सापेक्ष 90° के कोण पर खड़ी अवस्था में रखी गई हो, ऐसे दर्पण को लम्बवत् दर्पण कहते हैं। ऐसे दर्पण में सामने रखी गई वस्तु का प्रतिबिम्ब पलटा हुआ प्रतीत होता है अर्थात् मूल प्रतिरूप में वस्तु का जो भाग बाई ओर होता है वह प्रतिबिम्ब में दाई ओर एवं जो भाग दाई ओर होता है वह प्रतिबिम्ब में बाई ओर स्थानान्तरित होता है। इसे अच्छी तरह से समझने के लिए नीचे दिए गए आरेखों का ध्यानपूर्वक अवलोकन करें

यहाँ दिए गए आरेख में हम देख रहे हैं कि मूल प्रतिरूप में घण्टे की सूई घड़ी के बाई ओर ‘8’ पर अवस्थित है लेकिन दर्पण ‘AB, पर यह काल्पनिक प्रतिरूप के रूप में घड़ी के दाईं ओर 4 पर प्रतीत हो रही है जबकि मिनट की सूई चूंकि लम्बवत् है इसलिए पलटने पर भी वह अपने ही स्थान पर स्थिर प्रतीत हो रही है।
वास्तविक इस प्रकार निश्चित रूप से इस बात की पुष्टि होती है कि लम्बवत् दर्पण में वस्तु का बायाँ भाग दाई ओर एवं दायाँ भाग बाई ओर स्थानान्तरित प्रतीत होता है।

(ii) क्षैतिज दर्पण (Horizontal Mirror)— समतल दर्पण की ऐसी स्थिति जो किसी क्षेतिज तल के समानान्तर पड़ी अवस्था में रखी गयी हो ऐसे प्रितिबिम्बा समय दर्पण को क्षेतिज दर्पण कहते हैं। ऐसे दर्पण के सामने रखी गई वस्तु का प्रतिबिम्ब उल्टा हुआ प्रतीत होता है अर्थात् ऊपर की आकृति नीचे एवं नीचे की आकृति ऊपर हो जाती है, लेकिन बायाँ भाग बाएँ ही रहेगा और दायाँ भाग दाएँ ही रहेगा। इसे अच्छी तरह समझने हेतु नीचे दिए गए आरेख का अवलोकन करें

यहाँ हम देख रहे हैं कि उपरोक्त आरेख के मूल प्रतिरूप में घण्टे की सूई घड़ी के बाई ओर 9 से थोड़ी नीचे एवं मिनट की सूई घड़ी के दाई ओर 3 से एक स्थान ऊपर 2 पर अवस्थित है लेकिन दर्पण AB में यह काल्पनिक प्रतिरूप के रूप में बाई ओर ‘9″ से घण्टे की सूई जितनी नीचे थी वह ‘9″ से उतनी ही ऊपर तथा मिनट की सूई दाई ओर ‘3’ से जितनी ऊपर थी वह काल्पनिक प्रतिरूप में दाई ओर ‘3’ से उतनी ही नीचे प्रतीत हो रही है।

इस प्रकार निश्चित रूप से इस बात की पुष्टि होती है कि क्षेतिज दर्पण (Horizontal Mirror) में वस्तु का बायाँ भाग बाईं ओर तथा दायाँ भाग दाईं ओर 9 और 3 के सापेक्ष में उलट जाता है।

लम्बवत् दर्पण सम्बन्धी प्रश्नों को हल करने के प्रमुख नियम
लम्बवत् दर्पण से सम्बन्धित प्रश्नों को आसानी से हल करने के लिए एक निश्चित समय आधार 12:00 बजे का प्रयोग निम्न रूप में करना चाहिए।
यदि दिया गया समय वास्तविक समय हो तो

प्रतिबिम्बित (काल्पनिक) समय = 12:00 — वास्तविक समय

जैसे-यदि वास्तविक समय = 5:30 तो काल्पनिक समय = 12:00 -वास्तविक समय = 12:00 – 5:30 = 6:30

यदि दिया समय काल्पनिक अर्थात प्रतिबिम्बित समय हो, तो वास्तविक समय = 12 : 00 — काल्पनिक अर्थात् प्रतिबिम्बित समय

जैसे-यदि काल्पनिक समय = 4 : 15

वास्तविक समय = 12:00 – 4 : 15 = 7:45

अब आइये, इससे सम्बंधित कुछ प्रमुख उदाहरणों का ध्यानपूर्वक अवलोकन करें |

 

उदाहरण 1. त्रिलोकी की घड़ी में अंकों के स्थान पर बिन्दुकित निशान अंकित किए गए हैं। यदि उसमें किसी दर्पण के प्रतिबिम्ब में प्रतिबिम्बित समय के रूप में 12 बजकर 35 मिनट बजता हुआ प्रतीत हो रहा है, तो बताएँ कि उसकी घड़ी में उस वक्त वास्तव में कितना समय हो रहा था ?

(a) 1: 35   (b) 11:25   (c) 0: 35   (d) 12:30

हल: (b) वास्तविक समय = 24: 00 – 12: 35 = 11: 25
⇒ नोट-यहाँ यह ध्यान देना आवश्यक है कि समय के विषय में मिनट के स्थान पर उधार लेने की जरूरत हो तो इसे घण्टे से लिया जाता है। उधर लिया गया समय हमेशा ही 60 मिनट अर्थात एक घंटे के रूप में लिया जाता है। इस स्थिति में घंटे अपनी मूल स्थिति से ठीक 1 घंटे घट जाते हैं । इसके अतिरिक्त यदि किसी समय को समय आधार 12:00 बजे से घटाने के पश्चात् घण्टे के स्थान पर यदि 00’ प्राप्त हो अथवा ऋणात्मक घण्टे प्राप्त हो, तो उसके लिए समय आधार 12 : 00 बजे नहीं रखेंगे बल्कि उसके लिए समय आधार 24 : 00 बजे मानकर घटाएँगे जिससे अभीष्ट समय प्राप्त होगा। जैसे-24: 00 – 12 : 35 = 11: 25

 

उदाहरण 2. किसी घड़ी पर अंकों के स्थान पर बिन्दुओं के निशान लगाये गए हैं। यदि इस घड़ी में 6 बजकर 20 मिनट हो रहे हैं, तो किसी दर्पण के सामने जब इसे रखा जाएगा तो दर्पण के प्रतिबिम्ब में कितना समय प्रतीत होगा?

(a) 5:40  (b) 4: 55  (c) 5:45  (d) 5: 20

हल: (a) प्रतिबिम्बित समय = 12:00 – 6: 20 = 5:40

 

क्षैतिज दर्पण/जल प्रतिबिम्ब सम्बन्धी प्रश्नों को हल करने के प्रमुख नियम

I. सामान्यतः मिनट की सूई 60 एवं घण्टे की सूई ½° प्रति मिनट अपने स्थान से आगे की ओर विचलित होती है। जैसे-यदि किसी घड़ी में 7 बजकर 30 मिनट हो रहे हैं,
तो इस स्थिति में घण्टे की सूई अंक 7 से 15° ऊपर (अर्थात् 7 और 8 के बीच) एवं मिनट की सूई की स्थिति अंक ‘6′ पर होगी। लेकिन क्षेतिज दर्पण से सम्बन्धित प्रश्नों में घण्टे की सूई के विचलन पर विचार नहीं करना चाहिए इसलिए कि ऐसी स्थिति में वास्तविक समय से प्रतिबिम्बित समय या प्रतिबिम्बित समय से वास्तविक समय का सही रूप से निर्धारण नहीं किया जा सकता है। उपरोक्त तथ्यों के स्पष्टीकरण हेतु नीचे दी गई घड़ी की आवृत्ति का ध्यानपूर्वक अध्ययन करें

यहाँ हम देख रहे हैं कि वास्तविक अथवा काल्पनिक स्थिति में घण्टे की सई को ‘7’ से 15° ऊपर अर्थात् ‘7’ और 8 के ठीक बाच में तथा मिनट की सूत् । ‘6″ के स्थान पर निरूपित किया गया है जबकि प्रतिबिम्बित समय में घण्टे की सूई को वास्तविक समय की आकृतिक स्थिति के आधार पर उलटकर 10 और 11 के ठीक बीच में तथा मिनट की सूई को 12 के स्थान पर निरूपित किया गया है। वास्तविकता पर विचार किया जाए तो 7 बजकर 30 मिनट की स्थिति में क्षैतिज दर्पण आकृति निश्चित रूप से उपरोक्त प्रतिबिम्बित समय आकृति के अनुरूप ही होनी चाहिए लेकिन यह ‘समय के सिद्धान्त’ के विरुद्ध है इसलिए कि मिनट की सूई ’12” पर हो तथा घण्टे की सूई ’10” और ’11” के ठीक बीच में हो, ऐसा घण्टे और मिनट की सूईयों के विचलन के सिद्धान्त के एकदम विपरीत है जो किसी भी स्थिति मे सम्भव नहीं है। अत: उपरोक्त तथ्यों के आधार वास्तविक समय पर हम इस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं कि क्षैतिज दर्पण = 8:20 से सम्बन्धित प्रश्नो मे घण्टे की सूई को समय के सिद्धान्त के अनुरूप विचलित करते हुए कभी भी विचार नहीं करना चाहिए।

II. क्षैतिज दर्पण में वस्तु का प्रतिबिम्ब हमेशा उल्टा बनता है अर्थात् दर्पण में वस्तु का ऊपरी भाग’, ‘निचला भाग’ एवं ‘निचला भाग’, ‘ऊपरी भाग’ के रूप में प्रतिबिम्बित होता हैं।

क्षैतिज दर्पण के अन्तर्गत मूल आकृति प्रतिबिम्ब आकृति में उलट जाती है लेकिन उसके बाएँ और दाएँ भाग एक-दूसरे से परिवर्तित नहीं होते हैं जो कि इस बात की पुष्टि करता है कि क्षेतिज दर्पण में प्रतिबिम्ब केवल उल्टे प्रतीत होते हैं।

क्षेतिज दर्पण सम्बन्धित प्रश्नों को हल करने के लिए सबसे पहले ‘9’ तथा ‘3’ को समय आधार मानते हैं, जिनके आधार पर हम आसानी से किसी भी ‘वास्तविक समय को प्रतिबिम्बित समय या किसी भी प्रतिबिम्बित समय को ‘वास्तविक समय’ में परिवर्तित करके अभीष्ट समय का निर्धारण कर सकते हैं।

उपरोक्त आकृति में हम देख रहे हैं कि घड़ी में 8 बजकर 20 मिनट हो रहे हैं और इस स्थिति में घण्टे की सूई समय आधार ‘9’ से एक स्थान नीचे की ओर ‘8’ पर तथा मिनट की सूई समय आधार 3’ से एक स्थान नीचे 4 पर उपस्थित है लेकिन दर्पण पर घण्टे की सूई समय आधार ‘9″ से एक स्थान ऊपर 10 पर तथा मिनट की सूई समय आधार 3’ से एक स्थान ऊपर ‘2’ पर उपस्थित है।

अत: इन तथ्यों के आधार पर इस बात की पुष्टि होती है कि समय आधार 9’ से वास्तविक समय जितना नीचे होता है, वह दर्पण में उतना ही ऊपर तथा समय आधार ‘9’ से वास्तविक समय जितना ऊपर होता है, वह दर्पण में उतना ही नीचे परिवर्तित प्रतीत होता है और ठीक यही कारक, समय आधार ‘3’ के परिप्रेक्ष्य में भी लागू होता है अर्थात् समय आधार ‘3’ से जो भी सूई जितनी ही नीचे/ऊपर होती है वह दर्पण में उतनी ही ऊपर /नीचे की ओर परिवर्तित प्रतीत होती है। –

अब आइये इनसे सम्बंधित पूछे जाने वाले प्रश्नों के प्रारूप का ध्यानपूर्वक अवलोकन करें-

उदाहरण 1. यदि गौरी को किसी क्षेतिज दर्पण में देखने पर उसे उसकी घड़ी में प्रतिबिम्बित समय 10 बजकर 20 मिनट प्रतीत हो, तो बताएँ कि उसकी घड़ी में वास्तविक समय कितना हो रहा है, इस स्थिति में जबकि अंकों के स्थान पर बिन्दुकिंत निशान उपस्थित हो?

(a) 10:20   (b) 8: 10   (c) 5:40   (d) 1 : 10

हल : (b) प्रतिबिम्बितं समय = 10:20

क्षैतिज दर्पण में समय आधार पर घण्टे की सूई की स्थिति=’9″ से एक स्थान ऊपर ’10” पर एवं मिनट की सूई की स्थिति = “3” से एक स्थान नीचे 4′ पर
अत: वास्तविक में समय के आधार पर घण्टे की सूई की स्थिति = ‘9″ से एक स्थान नीचे ‘8 पर एवं मिनट की सूई की स्थिति = “3” से एक स्थान ऊपर ‘2’ पर
अत: वास्तविक समय = 8 : 10

 

उदाहरण 2. चन्दू की घड़ी में अंकों के स्थान पर बिन्दुकिंत निशान अंकित हैं। यदि उसकी घड़ी में अभी 12 बज रहे हों, तो किसी क्षेतिज दर्पण में देखने पर उसे उसकी घड़ी में कितना बजता प्रतीत होगा?

(a) 6:30   (b) 12:00   (c) 12:30   (d) 11:45

हल : (a) वास्तविक घड़ी में 12 बज रहे हैं और 12 बजे घण्टे की सूई एवं मिनट की सूई दोनों ’12” पर उपस्थित होंगी।
इसलिए जब इसे क्षेतिज दर्पण में देखा जाएगा तो घड़ी एवं मिनट की सूई दोनों ‘6″ पर उपस्थित होंगी।
अत: क्षेतिज दर्पण में अभीष्ट समय = 6 : 30

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